कंकर से तीर्थंकर बनाने वाला धर्म जैन धर्म है-क्रांतिवीर संत श्री प्रतीक सागर जी

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उज्जैन, कैलाश कृपा। यदि जीवन से भय निकल जावे तो आप निर्भय हो जाएंगे। कंकर से तीर्थंकर बनाने वाला धर्म जैन धर्म है। बीमारी के तीन कारण है वात, पित्त एवं कफ। झगड़े के भी तीन कारण है जर, जोरू और जमीन, देवता भी तीन प्रमुख है ब्रह्मा, विष्णु, महेश। तीन देवियां है लक्ष्मी, सरस्वती, दुर्गा। तीन लोक बताए है उर्ध्व लोक, मध्यलोक, पाताल लोक। आदमी की जिंदगी के तीन क्रम है बचपन, यौवन, बुढ़ापा। तीन का आंकड़ा कभी छूटता नहीं है यह उज्जैन जैन समाज का सौभाग्य है कि आज त्रिवेणी का संगम यहां विराजित है। संतों का समागम तभी मिलता है जब एकेंद्रीय से लेकर पंचेंद्रीय तक के लोगों को पुण्य का उदय होता है।

उक्त विचार आचार्य पुष्पदंत सागर जी के परम शिष्य क्रांतिवीर मुनि श्री प्रतीक सागर जी ने अपने उज्जैन मंगल प्रवेश के अवसर पर कहे। आपने कहा नो के अंकों का उदाहरण देते हुए कहा कि नोका कभी अपनी मर्यादा नहीं छोड़ता, नो के पहाड़े में नो के अंक का जोड़ हर वक्त आता है। उसी तरह संत भी कभी अपनी मर्यादा नहीं छोड़ते उनमें तीर्थंकर बनने की क्षमता आ जाती है। आपने अपनी धाराप्रवाह शैली में प्रवचन करते हुए कहा कि जंग लगा लोहा कभी स्वर्ण नहीं बन सकता। बहानेबाजी की जिंदगी हमें छोड़ना पड़ेगी। कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। संचालन शैलेंद्र जैन ने किया।

कलेक्टर ने किया स्वामी मुस्कुराके का बहुमान

कंकर से तीर्थंकर बनाने वाला धर्म जैन धर्म है-क्रांतिवीर संत श्री प्रतीक सागर जी

महाराज जी के पाद प्रक्षालन वीर सेन जैन, डॉ. दिनेश वैध, रमेश जैन एकता ज्वेलर्स ने किये। दीप प्रज्वलन अशोक जैन चायवाला, हीरालाल बीलाला, इंदरचंद जैन, धर्मेंद्र सेठी, ललित सेठी, अनिल जैन बाटू भैया ने किया। इस अवसर पर पूर्व विधायक शिवा कोटवानी, विश्व हिंदू परिषद के विनोद शर्मा एवं शहर कांग्रेस कोषाध्यक्ष सुरेश छाबड़ा, अशोक राणा एवं उज्जैन समाज के सभी मंदिरों के गणमान्य महानुभाव ने श्रीफल भेंट किया।

आज प्रेमछाया में विशेष प्रवचन

क्रांतिवीर मुनि श्री प्रतीक सागर जी महाराज के विशेष प्रवचन आज प्रेमछाया परिसर में होंगे। महाराजश्री आज मंगलवार प्रातः 8.30 बजे से समाजजनों को प्रवचन देंगे।

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