जागृत और जीवंत आत्माएं अपने जागरण को सार्थक करके दिखाएं- डॉ चिन्मय पण्डया

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उज्जैन संभाग के लिए हरिद्वार पहुंचा आपके द्वार अभियान का शुभारंभ


उज्जैन, कैलाश कृपा। आज की परिस्थितियां युगांतरकारी, क्रांतिकारी, भयंकर परिवर्तनकारी हैं, इनके कारण पूरी की पूरी मानवता संक्रमण के दौर से गुजर रही है। इन घड़ियों में मानवता का पथ किसी तरफ को जा सकता है। आदमी की सोच, भावनाओं, दृष्टिकोण हर चीज में बदलाव जरूरी हो गया है। ऐतिहासिक, असाधारण और असामान्य परिस्थितियों में हर मन में देवासुर संग्राम जैसा चल रहा है, एक देवासुर संग्राम में अमृत कलश निकला था और उसी की यात्रा से कुंभ मेला प्रारंभ हुए थे।

अगले वर्ष का कुंभ हरिद्वार में एक विशेष परिस्थितियों में लगने जा रहा है यह कुंभ 11 वर्ष के अंतराल में आ रहा है और ऐसा  80 वर्ष पहले हुआ था। जब-जब भी 11 वर्ष में महाकुंभ आया है उसके 1 वर्ष पहले मानवता के सामने अनेक चुनौतियां आई हैं, महामारी आई हैं लेकिन इसके तुरंत बाद सुखद संयोग की शुरुआत सुख सौभाग्य की बृद्धी हुईं है।

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हरिद्वार पहुंचा आपके द्वार अभियान का उज्जैन में शुभारंभ करते हुए डॉ चिन्मय पंड्या प्रति कुलपति देव संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार ने यह विचार परिजनों के सामने गायत्री शक्तिपीठ उज्जैन पर व्यक्त किए। आपने बताया कि हरिद्वार पहुंचा आपके द्वार अभियान के तहत देव स्थापना गंगाजल के साथ सुख शुभ संकल्प जगाने, संस्कार भावना को पोषित करने का अभियान जोड़ा गया है जो सुखदाई परिणाम देगा।

जागृत और जीवंत आत्माएं अपने जागरण को सार्थक करके दिखाएं- डॉ चिन्मय पण्डया

आपने जागृत और जीवंत आत्माओं का आवाह्न किया कि इस अभियान की महत्ता को पहचान कर इससे जन साधारण को लाभान्वित कराने के लिए आगे आएं। डॉ चिन्मय पंड्या ने शहर के ग्यारह घरों में जाकर गंगाजल देव स्थापना अपने हाथों से की। गायत्री शक्तिपीठ पर सोमवार को आयोजित समारोह में उज्जैन संभाग के लिए अभियान का शुभारंभ किया गया इसमें उज्जैन, शाजापुर और आगर जिले के प्रमुख परिजनों ने भागीदारी की।

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